“उत्तर प्रदेश सरकार ने काशी में टूरिज्म सेक्टर को बूस्ट करने के लिए लोकल गाइड्स, बोटमैन और वेंडर्स के लिए सॉफ्ट स्किल्स ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किया है। यह पहल नौकरियों को बढ़ावा देगी और पर्यटकों को बेहतर अनुभव प्रदान करेगी। IITTM के नेतृत्व में, यह प्रोग्राम स्थानीय संस्कृति को संरक्षित करते हुए वैश्विक मानकों को अपनाएगा।”
उत्तर प्रदेश में टूरिज्म सेक्टर की नई उड़ान: लोकल गाइड्स के लिए ट्रेनिंग
उत्तर प्रदेश सरकार ने टूरिज्म सेक्टर में क्रांति लाने के लिए एक महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। काशी (वाराणसी) में शुरू किए गए सॉफ्ट स्किल्स ट्रेनिंग प्रोग्राम का उद्देश्य लोकल गाइड्स, बोटमैन, ऑटो-रिक्शा ड्राइवर्स, वेंडर्स और हस्तशिल्प विक्रेताओं को प्रशिक्षित करना है। इस पहल को Indian Institute of Tourism and Travel Management (IITTM) लागू कर रहा है, जो स्थानीय सेवा प्रदाताओं को संचार, आतिथ्य शिष्टाचार और सांस्कृतिक समझ से लैस करेगा।
हाल के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में टूरिज्म सेक्टर ने 2024 में 46.5 मिलियन नौकरियों को सपोर्ट किया, और World Travel & Tourism Council (WTTC) का अनुमान है कि 2035 तक यह आंकड़ा 64 मिलियन तक पहुंच सकता है। काशी, जो अपनी प्राचीन आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है, इस प्रोग्राम के जरिए वैश्विक पर्यटकों के लिए आकर्षक डेस्टिनेशन बनने की दिशा में बढ़ रहा है।
लोकल गाइड्स के लिए ट्रेनिंग का फोकस
यह ट्रेनिंग प्रोग्राम सॉफ्ट स्किल्स पर केंद्रित है, जिसमें प्रभावी संचार, पर्यटकों के साथ व्यवहार, और स्थानीय संस्कृति की गहरी समझ शामिल है। उदाहरण के लिए, गंगा नदी के किनारे बोटमैन को प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वे पर्यटकों को न केवल नाव की सैर कराएं, बल्कि काशी की कहानियों और इतिहास को रोचक ढंग से पेश करें। इसी तरह, लोकल गाइड्स को मल्टीलिंग्वल स्किल्स और प्रोफेशनल व्यवहार सिखाया जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाएगा।
इको-टूरिज्म और रोजगार के अवसर
उत्तर प्रदेश सरकार ने इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए भी कदम उठाए हैं। ‘Buffer Mein Safar’ योजना के तहत, दुधवा, पीलीभीत टाइगर रिजर्व और नॉर्थ खीरी के बफर जोन्स में नई सफारी रूट्स विकसित किए जा रहे हैं। स्थानीय युवाओं को नेचर गाइड्स, रेस्तरां ऑपरेटर्स और अन्य टूरिज्म से संबंधित भूमिकाओं के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। इन पहलों ने न केवल कौशल विकास को बढ़ावा दिया है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं।
उदाहरण के लिए, दुधवा टूरिज्म कॉम्प्लेक्स में एक आधुनिक सूचना केंद्र स्थापित किया गया है, जो जैव-विविधता, वन्यजीवों और स्थानीय संस्कृति के बारे में जानकारी देता है। यह केंद्र पर्यटकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने में भी मदद करता है।
आर्थिक प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं
टूरिज्म सेक्टर उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है। 2024 में, इस सेक्टर ने राज्य के GDP में $249.3 बिलियन का योगदान दिया, और 2035 तक इसके 10.9% तक बढ़ने की उम्मीद है। यह ट्रेनिंग प्रोग्राम न केवल सेवा की गुणवत्ता को बढ़ाएगा, बल्कि स्थानीय समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल काशी को एक वैश्विक टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित कर सकती है, जो प्राचीन परंपराओं और आधुनिक आतिथ्य का अनूठा मिश्रण पेश करेगा।
हालांकि, चुनौतियां भी हैं। टूरिज्म सेक्टर में स्किल्ड वर्कफोर्स की कमी एक बड़ी बाधा है। भारत में केवल 1% आतिथ्य कर्मचारी औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं, जिसके कारण सेवा की गुणवत्ता प्रभावित होती है। उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम इस कमी को दूर करने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है।
क्या है खास?
यह प्रोग्राम न केवल नौकरियों को बढ़ावा देगा, बल्कि पर्यटकों के लिए एक यादगार अनुभव भी सुनिश्चित करेगा। काशी में प्रशिक्षित गाइड्स और सेवा प्रदाता न केवल स्थानीय संस्कृति को जीवंत करेंगे, बल्कि पर्यटकों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाएंगे। यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है, जो टूरिज्म को सतत और समावेशी विकास का जरिया बनाना चाहते हैं।
Disclaimer: यह लेख हाल के समाचारों, सरकारी पहलों, और विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। डेटा और तथ्य WTTC, IITTM, और अन्य प्रामाणिक स्रोतों से लिए गए हैं। सलाह दी जाती है कि नवीनतम अपडेट्स के लिए आधिकारिक वेबसाइट्स की जांच करें।