“उत्तर प्रदेश सरकार ने महिलाओं के लिए नई माइक्रोफाइनेंस योजना शुरू की है, जो ग्रामीण और शहरी महिलाओं को बिना गारंटी के छोटे लोन प्रदान करेगी। यह योजना स्वरोजगार, वित्तीय स्वतंत्रता और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देगी। 2025 में 10 लाख महिलाओं को लाभ देने का लक्ष्य है, जिसमें कम ब्याज दरें और प्रशिक्षण शामिल हैं।”
यूपी में महिलाओं के लिए माइक्रोफाइनेंस क्रांति
उत्तर प्रदेश सरकार ने 2025 में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एक महत्वाकांक्षी माइक्रोफाइनेंस योजना लॉन्च की है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 10 लाख महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत, 18 से 58 वर्ष की महिलाएं 20,000 से 1 लाख रुपये तक के बिना गारंटी लोन प्राप्त कर सकती हैं। ब्याज दरें पारंपरिक बैंकों की तुलना में कम, यानी 4-6% प्रति वर्ष, रखी गई हैं, जिससे महिलाएं आसानी से छोटे व्यवसाय शुरू कर सकें।
योजना का मुख्य आकर्षण है इसका जोर स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और जॉइंट लायबिलिटी ग्रुप्स (JLGs) पर। हाल के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 12 लाख SHGs सक्रिय हैं, जिनमें 85% महिलाएं हैं, जो पहले से ही माइक्रोफाइनेंस के जरिए छोटे उद्यम चला रही हैं। नई योजना के तहत, इन समूहों को अतिरिक्त फंडिंग के साथ-साथ बिजनेस प्रशिक्षण और डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम भी मिलेंगे। उदाहरण के लिए, लखनऊ की राधिका देवी ने 2024 में 30,000 रुपये का लोन लेकर सिलाई मशीन खरीदी और अब महीने में 15,000 रुपये कमा रही हैं।
इस योजना को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के साथ जोड़ा गया है, जिसने नवंबर 2024 तक SHGs को 9.71 लाख करोड़ रुपये का बैंक क्रेडिट प्रदान किया है। यूपी सरकार ने 2025-26 के लिए 50,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, जिसमें से 30% महिलाओं के लिए माइक्रोफाइनेंस पर खर्च होगा। योजना में ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म www.esaras.in का उपयोग भी शामिल है, जो SHG उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाएगा।
हालांकि, चुनौतियां भी हैं। 2022 के एक IFC रिपोर्ट के अनुसार, 90% महिला उद्यमियों को औपचारिक वित्तीय संस्थानों से लोन नहीं मिला। योजना का लक्ष्य इस अंतर को कम करना है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता और डिजिटल पहुंच बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए सरकार ने 1,35,127 बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट सखियों को तैनात किया है, जो गांवों में वित्तीय सेवाएं पहुंचा रही हैं।
योजना के तहत लोन की प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाया गया है। महिलाएं ऑनलाइन पोर्टल या स्थानीय माइक्रोफाइनेंस संस्थानों जैसे Chaitanya India के जरिए आवेदन कर सकती हैं। लोन स्वीकृति में 7-10 दिन लगते हैं, और JLG मॉडल में समूह के सदस्य एक-दूसरे की गारंटी लेते हैं। यह मॉडल महिलाओं में विश्वास और सामुदायिक एकता को बढ़ाता है।
2025 में यह योजना न केवल आर्थिक विकास को गति देगी, बल्कि सामाजिक बदलाव भी लाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय साक्षरता और स्वरोजगार के जरिए महिलाएं न केवल अपने परिवारों को सशक्त बनाएंगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेंगी।
Disclaimer: यह लेख उत्तर प्रदेश सरकार, DAY-NRLM, और अन्य विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। आंकड़े और तथ्य नवंबर 2024 तक के हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लोन आवेदन से पहले आधिकारिक पोर्टल या स्थानीय अधिकारियों से जानकारी सत्यापित करें।