“उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाखों गरीब परिवारों को पक्का मकान मिलेगा। योगी सरकार ने 2025 में 59 लाख नए लाभार्थियों को घर देने का लक्ष्य रखा है। हालाँकि, योजना में भ्रष्टाचार और अपात्र लाभार्थियों की शिकायतें भी सामने आई हैं। जानें ताजा अपडेट और पात्रता मानदंड।”
यूपी में गरीबों के लिए पक्के मकान का सपना होगा साकार
उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री आवास योजना (सीएमएवाई) और प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत गरीबों को पक्का मकान देने की अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में यूपी में 59 लाख गरीब परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान तीसरी बार केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद शुरू हुए व्यापक सर्वे का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य झुग्गी-झोपड़ियों और कच्चे मकानों से मुक्ति दिलाना है।
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस योजना को ‘अंत्योदय से समाजोदय’ की संकल्पना से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि हर गरीब परिवार को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इस दिशा में, ग्रामीण क्षेत्रों में पीएमएवाई के तहत लाभार्थियों को 1.20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है, जबकि पहाड़ी और आदिवासी क्षेत्रों में यह राशि 1.30 लाख रुपये तक हो सकती है। यह राशि चार किश्तों में सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है।
हाल ही में, उन्नाव के लोधनहार क्षेत्र में पीएमएवाई के तहत 96 फ्लैट्स के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हुई, जहाँ जरूरतमंद और भूमिहीन परिवारों को 5.65 लाख रुपये में घर उपलब्ध कराए जाएँगे। आवेदन के लिए विशेष शिविर 16 जून से 15 जुलाई तक लगाए गए हैं। वहीं, बिक्रमगंज में 20 लाभार्थियों को पीएमएवाई 2.0 के तहत प्रमाण-पत्र वितरित किए गए, जिन्हें ढाई लाख रुपये की सहायता दी जाएगी।
लेकिन, योजना के कार्यान्वयन में चुनौतियाँ भी सामने आई हैं। विशुनपुरा (कुशीनगर) में सरकारी खलिहान की जमीन पर सात अपात्र लोगों को आवास आवंटित करने का मामला उजागर हुआ, जिससे 9.60 लाख रुपये का नुकसान हुआ। ग्रामीणों ने रिश्वतखोरी का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। इसी तरह, देवरिया के लार क्षेत्र में 15 से 50 हजार रुपये तक रिश्वत लेकर अपात्र लोगों को लाभ देने की शिकायतें दर्ज की गई हैं। मुरादाबाद में 14,779 आवेदनों में से 12,000 से अधिक निरस्त किए गए, क्योंकि कई साधन संपन्न लोग भी योजना का लाभ लेने की कोशिश कर रहे थे।
यूपी सरकार ने इन अनियमितताओं पर कड़ा रुख अपनाया है। मढ़ौरा (छपरा) में अवैध वसूली के खिलाफ कार्यकारी अधिकारी ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। मुरादाबाद की परियोजना अधिकारी अनामिका सिंह ने कहा कि केवल पात्र व्यक्तियों को ही लाभ दिया जाएगा, और लग्जरी कार या पक्का मकान रखने वालों के आवेदन रद्द किए जा रहे हैं।
पात्रता के लिए आवेदक की उम्र 18 वर्ष से अधिक, बीपीएल कार्ड धारक, बेघर या कच्चे मकान में रहने वाला और आर्थिक रूप से कमजोर होना जरूरी है। लाभार्थी अपने आवेदन की स्थिति pmayg.nic.in पर ‘AwaasSoft’ सेक्शन के तहत चेक कर सकते हैं।
योजना की सफलता की कहानियाँ भी प्रेरणादायक हैं। जशपुर (छत्तीसगढ़) के 70 वर्षीय संतु चक्रेस ने पीएमएवाई के तहत पक्का मकान पाकर मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “यह मकान मेरे लिए आत्म-सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक है।”
यूपी में आवासीय मांग बढ़ने के बीच, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पीएमएवाई-शहरी 2.0 के तहत घरों की कीमत बढ़ सकती है, क्योंकि बिल्डर्स कम लागत में निर्माण से हिचक रहे हैं। फिर भी, सरकार का लक्ष्य 2025-26 में लाखों गरीबों के लिए आवास सुनिश्चित करना है, जिससे यूपी में हर गरीब का सपना साकार हो सके।
Disclaimer: यह लेख हाल के समाचारों, सरकारी योजनाओं और विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित है। डेटा और तथ्य भास्कर, हिंदुस्तान, और अन्य समाचार स्रोतों से लिए गए हैं। पाठकों को सलाह दी जाती है कि आवेदन से पहले आधिकारिक वेबसाइट pmayg.nic.in पर जानकारी सत्यापित करें।