“उत्तर प्रदेश में गाय के गोबर से बने प्राकृतिक पेंट की अनोखी पहल! मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी भवनों में इसके इस्तेमाल का आदेश दिया। यह पेंट पर्यावरण के अनुकूल, सस्ता और एंटी-बैक्टीरियल है। ग्रामीण महिलाओं और गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ यह पहल रोजगार के नए अवसर खोल रही है।”
यूपी की गोबर पेंट क्रांति: पर्यावरण और आजीविका का संगम
उत्तर प्रदेश में गाय के गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने की पहल ने पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण रोजगार को नया आयाम दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 5 मई 2025 को पशुपालन और दुग्ध विकास विभाग की समीक्षा बैठक में निर्देश दिया कि सभी सरकारी भवनों, पंचायत भवनों, स्कूलों और ब्लॉक कार्यालयों में गोबर से बने प्राकृतिक पेंट का उपयोग हो। यह पेंट न केवल पर्यावरण के लिए सुरक्षित है, बल्कि पारंपरिक पेंट की तुलना में सस्ता और स्वास्थ्यवर्धक भी है।
गोबर से बना यह पेंट जीवाणुरोधी, एंटी-फंगल, गंधहीन और थर्मल इंसुलेशन गुणों से युक्त है। यह चार घंटे में सूख जाता है और पांच साल तक दीवारों पर टिका रहता है। गर्मियों में यह घरों को ठंडा और सर्दियों में गर्म रखता है। खादी ग्रामोद्योग आयोग द्वारा विकसित इस पेंट में वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स (VOCs) न के बराबर होते हैं, जिससे यह पर्यावरण के लिए आदर्श है।
नोएडा के सेक्टर 146 में श्री कृष्ण सुदामा गोशाला में गोबर पेंट का प्लांट स्थापित किया गया है। प्लांट संचालक केशव गुर्जर के अनुसार, गोबर को बॉयलर में गर्म कर स्लरी बनाई जाती है, जिसमें चूना, ग्वार गम और सोडियम बेंजोएट मिलाकर पेंट तैयार किया जाता है। यह प्रक्रिया ऊर्जा की खपत कम करती है और लागत में 50% तक की बचत करती है।
इस पहल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिल रहा है। उन्नाव के नवाबगंज में अन्नपूर्णा प्रेरणा महिला लघु उद्योग कार्यशाला में 20 महिलाएं गोबर पेंट बनाकर प्रतिदिन 200 रुपये कमा रही हैं। मिथिलेश सिंह, एक कार्यकर्ता, ने बताया कि मार्च 2023 में पहली बार 4000 रुपये की कमाई उनके लिए यादगार थी। यह पहल महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रही है।
यूपी सरकार ने 40,968.29 हेक्टेयर चरागाहों को अतिक्रमण से मुक्त कर 12,168.78 हेक्टेयर को हरे चारे के लिए समर्पित किया है। इससे 21,884 गौसेवकों को प्रशिक्षण और रोजगार मिला है। बरेली में इफ्को के सहयोग से जैविक खाद और गोमूत्र प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने ‘मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना’ के तहत गरीब परिवारों को गायें प्रदान करने का निर्देश दिया है। इससे दूध की उपलब्धता बढ़ेगी और परिवारों का पोषण स्तर सुधरेगा। गाजियाबाद में नगर निगम ने ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रॉपीज 2025 मेयर्स चैलेंज के तहत 50 लाख रुपये प्राप्त कर दो वार्डों में गोबर पेंट का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है।
बागपत में एक गोबर पेंट प्लांट 1 किलो गोबर से 700 रुपये की आय उत्पन्न कर रहा है, जिसमें एक गाय प्रतिदिन 8 किलो गोबर देती है, जिससे 5500 रुपये की दिक आय संभव है। यह पेंट 225-250 रुपये प्रति लीटर की कीमत पर बिकता है, जो बाजार में 400 रुपये प्रति लीटर के ब्रांडेड पेंट से सस्ता है।
सीएम योगी ने गोबर पेंट संयंत्रों की संख्या बढ़ाने और तकनीकी-वित्तीय सहायता प्रदान करने का आदेश दिया है। बदायूं को मॉडल बनाकर सभी जिलों में पेंट प्लांट स्थापित करने की योजना है। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दे रही है, बल्कि गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाकर ग्रामीण रोजगार को नई दिशा दे रही है।
Disclaimer: यह लेख हाल के समाचारों, विश्वसनीय वेब स्रोतों और एक्स पोस्ट्स पर आधारित है। जानकारी की सटीकता के लिए संबंधित सरकारी और खादी ग्रामोद्योग आयोग के दस्तावेजों का अवलोकन करें। यह लेख सूचना और जागरूकता के उद्देश्य से है।