“उत्तर प्रदेश सरकार ने 2025 में महिलाओं के लिए 50 नए स्किल ट्रेनिंग सेंटर खोलने की घोषणा की है। ये सेंटर डिजिटल लिटरेसी, सिलाई, ब्यूटीशियन और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देंगे। लक्ष्य है 1 लाख महिलाओं को 2026 तक आत्मनिर्भर बनाना। ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान, मुफ्त कोर्स और जॉब प्लेसमेंट सहायता शामिल।”
यूपी में महिलाओं के लिए स्किल ट्रेनिंग की नई पहल
उत्तर प्रदेश सरकार ने महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए 2025 में 50 नए स्किल ट्रेनिंग सेंटर शुरू करने की योजना बनाई है। ये सेंटर लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, और गोरखपुर जैसे प्रमुख शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य 2026 तक 1 लाख महिलाओं को स्किल ट्रेनिंग प्रदान कर रोजगार के अवसर सुनिश्चित करना है।
इन सेंटरों में डिजिटल लिटरेसी, सिलाई, ब्यूटीशियन, हेल्थकेयर, और रिटेल जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं के लिए, सरकार ने मोबाइल ट्रेनिंग यूनिट्स और फ्लेक्सिबल बैच टाइमिंग की व्यवस्था की है ताकि घरेलू जिम्मेदारियों के साथ प्रशिक्षण संभव हो। प्रत्येक सेंटर में 30% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
हाल के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में केवल 22.8% महिलाएं कार्यबल में शामिल हैं, जो राष्ट्रीय औसत 23.3% से भी कम है। इस अंतर को कम करने के लिए, सरकार ने National Skill Development Corporation (NSDC) के साथ साझेदारी की है, जो तकनीकी विशेषज्ञता और जॉब प्लेसमेंट में सहायता प्रदान करेगा। 2024 में NSDC ने यूपी में 10,000 महिलाओं को प्रशिक्षित किया, जिनमें से 70% को रोजगार मिला।
लखनऊ के एक सेंटर में पायलट प्रोजेक्ट के तहत 500 महिलाओं को डिजिटल लिटरेसी और सिलाई में प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें 80% ने स्वरोजगार शुरू किया या स्थानीय उद्यमों में नौकरी प्राप्त की। सरकार अब इस मॉडल को पूरे राज्य में लागू कर रही है। ग्रेटर नोएडा में एक आधुनिक स्किल डेवलपमेंट सेंटर भी स्थापित किया जा रहा है, जो IITGNL और NICDC के सहयोग से संचालित होगा।
महिलाओं के लिए क्रèche सुविधा, मुफ्त परिवहन, और प्रशिक्षण के बाद स्टाइपेंड जैसी सुविधाएं भी दी जाएंगी। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी को देखते हुए, सरकार ने NIIT Foundation के साथ मिलकर डिजिटल बस प्रोग्राम शुरू किया है, जो दूरदराज के क्षेत्रों में प्रशिक्षण पहुंचाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि ये सेंटर न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करेंगे, बल्कि सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ने में भी मदद करेंगे। उदाहरण के तौर पर, वाराणसी की एक प्रशिक्षु, रीता देवी, ने सिलाई कोर्स पूरा करने के बाद अपनी बुटिक शुरू की और अब महीने में 15,000 रुपये कमा रही हैं।
हालांकि, चुनौतियां भी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन और इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी प्रशिक्षण में बाधा बन सकती है। सरकार ने इन समस्याओं के समाधान के लिए स्थानीय पंचायतों और NGOs के साथ सहयोग बढ़ाने की योजना बनाई है। 2025 के अंत तक, इन सेंटरों से 25,000 महिलाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है, जिसमें से 70% को रोजगार या स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
Disclaimer: यह लेख हाल के समाचारों, सरकारी घोषणाओं, और विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित है। जानकारी सटीकता के लिए जांची गई है, लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक सरकारी पोर्टल्स से नवीनतम अपडेट्स की पुष्टि करें।