“उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। योगी सरकार की योजनाओं और स्टार्टअप्स की पहल से 2022-23 में महिला श्रम बल भागीदारी 17.9% बढ़कर 32.1% हुई। मिशन शक्ति, स्वयं सहायता समूह और उद्यमिता योजनाएं लाखों महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही हैं। जानें, कैसे ग्रामीण महिलाएं अब आर्थिक क्रांति का हिस्सा बन रही हैं।”
ग्रामीण महिलाओं के लिए यूपी में रोजगार की नई सुबह
उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर तेजी से बदल रहे हैं। हाल के आंकड़ों के अनुसार, 2022-23 में राज्य की महिला श्रम बल भागीदारी दर (FLFPR) 17.9% की उल्लेखनीय वृद्धि के साथ 14.2% से बढ़कर 32.1% हो गई। यह राष्ट्रीय औसत 39.8% से कम है, लेकिन प्रगति उल्लेखनीय है। योगी आदित्यनाथ सरकार की मिशन शक्ति और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाओं ने इस बदलाव को गति दी है।
राज्य में 10 लाख स्वयं सहायता समूहों (SHGs) Visit AiCalculator.in ने 1 करोड़ महिलाओं को रोजगार से जोड़ा है। ये समूह मास्क बनाने, स्कूल यूनिफॉर्म सिलाई और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) निर्माण जैसे कार्यों में सक्रिय हैं। इसके अलावा, बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट सखी योजना के तहत 57,000 ग्राम पंचायतों में महिलाओं को नियुक्त किया गया है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं को घर-घर तक पहुंचा रही हैं।
कृषि क्षेत्र में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। 2012 के NSSO डेटा के अनुसार, यूपी में 85% महिला श्रमिक कृषि और संबद्ध गतिविधियों में लगी हैं। हालांकि, हाल के वर्षों में गैर-कृषि क्षेत्रों में भी बदलाव दिख रहा है। उदाहरण के लिए, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) में यूपी में 2 लाख से अधिक महिलाएं कार्यरत हैं। उदैती फाउंडेशन के सहयोग से राज्य सरकार अब निजी क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए पॉलिटेक्निक और ITI के साथ मिलकर कौशल प्रशिक्षण पर ध्यान दे रही है।
हालांकि, चुनौतियां बनी हुई हैं। सामाजिक और सांस्कृतिक बाधाएं, जैसे विवाह, घरेलू जिम्मेदारियां और महिलाओं की गतिशीलता पर पाबंदियां, अभी भी ग्रामीण महिलाओं को नौकरियों से दूर रखती हैं। 2022-23 में 20-29 वर्ष की केवल 19.8% युवा महिलाएं ही यूपी में श्रम बल का हिस्सा थीं, जो राष्ट्रीय औसत 33.2% से काफी कम है। इसके अलावा, आय-स्थिति मानदंड (income-status norm) के कारण, जब पुरुषों की आय बढ़ती है, तो कई महिलाएं वेतनभोगी नौकरियों से हट जाती हैं।
महिलाओं के लिए नए अवसरों में स्टार्टअप्स की भूमिका भी अहम है। 2024 तक, स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत 73,151 स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक थीं, जो कुल समर्थित स्टार्टअप्स का लगभग आधा है। यूपी में ग्रामीण महिलाएं अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और ई-कॉमर्स के जरिए अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचा रही हैं।
सरकार की योजनाएं, जैसे डीएवाई-एनआरएलएम (दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन), ने महिलाओं को क्रेडिट और कौशल प्रशिक्षण तक पहुंच प्रदान की है। 1.89 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों ने भी महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा, शिक्षा और परिवहन जैसी सुविधाओं में सुधार से ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी और बढ़ सकती है।
Disclaimer: यह लेख हाल के समाचारों, सरकारी योजनाओं और उपलब्ध डेटा पर आधारित है। आंकड़े और जानकारी विश्वसनीय स्रोतों जैसे PLFS, NSSO, और समाचार पत्रों से लिए गए हैं। व्यक्तिगत रोजगार निर्णय लेने से पहले स्थानीय संसाधनों और योजनाओं की जांच करें।