“उत्तर प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 750 से अधिक होमस्टे और 234 गाँव पर्यटन हब के रूप में विकसित किए जा रहे हैं। 2025 में आयोजित ग्रामीण पर्यटन कॉन्क्लेव ने स्थानीय संस्कृति, रोजगार और सतत विकास पर जोर दिया। पर्यटक अब गाँवों में स्थानीय जीवन, खेती और हस्तशिल्प का अनुभव ले सकते हैं।”
यूपी में ग्रामीण पर्यटन का नया दौर: होमस्टे और सतत विकास
उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए व्यापक रणनीति अपनाई है। हाल ही में लखनऊ में आयोजित ग्रामीण पर्यटन कॉन्क्लेव 2025 में, पर्यटन और संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, “भारत की संस्कृति और मूल्य गाँवों से शुरू होते हैं। ग्रामीण पर्यटन न केवल पर्यटकों को प्रामाणिक अनुभव देगा, बल्कि स्थानीय समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त भी करेगा।” इस कॉन्क्लेव में 40 से अधिक होमस्टे और फार्मस्टे मालिकों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
राज्य सरकार ने 234 गाँवों को पर्यटन हब के रूप में चिह्नित किया है, जहाँ 750 से अधिक होमस्टे निर्माणाधीन हैं। इन होमस्टे में पर्यटक स्थानीय संस्कृति, खेती, और हस्तशिल्प से रूबरू हो सकेंगे। उदाहरण के लिए, बाराबंकी में ग्रो फार्मस्टे में पर्यटक पद्म श्री पुरस्कार विजेता किसान राम शरण वर्मा से मिल सकते हैं और पारंपरिक भोजन का आनंद ले सकते हैं।
कॉन्क्लेव में 285 ग्रामीण युवाओं को आतिथ्य, संस्कृति और पर्यटन प्रबंधन में प्रशिक्षण देने की घोषणा की गई। यह प्रशिक्षण स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों और पर्यटन कंपनियों के सहयोग से दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीण युवा पर्यटन उद्योग में नेतृत्वकारी भूमिका निभा सकें। विशेष सचिव पर्यटन ईशा प्रिया ने बताया, “हमने 18 गैर-सरकारी संगठनों को शामिल किया है और 25% सब्सिडी के साथ-साथ स्टांप ड्यूटी में छूट जैसे लाभ भी प्रदान किए हैं।”
यूपी सरकार की यह पहल सतत विकास पर केंद्रित है। ग्रामीण पर्यटन न केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को भी बनाए रखेगा। कॉन्क्लेव में प्राकृतिक खेती, एग्री-टूरिज्म और सामुदायिक पर्यटन पर विशेष सत्र आयोजित किए गए, जिसमें भारत के एग्री-टूरिज्म पायनियर पांडुरंग तावरे और ‘लेक मैन ऑफ इंडिया’ अन्नादानी मल्लिगावद जैसे विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।
इसके अलावा, एक विशेष FAM ट्रिप का आयोजन किया जा रहा है, जो चंद्रिका देवी मंदिर से शुरू होकर चंद्रकांता, इकिगाई और मिदोरी फार्म्स तक जाएगा। इस ट्रिप में पर्यटक स्थानीय कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमियों से मिल सकेंगे। यह पहल ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
यूपी का ग्रामीण पर्यटन न केवल शहरी पर्यटकों को गाँवों की सादगी और आतिथ्य से जोड़ेगा, बल्कि यह स्थानीय समुदायों के लिए आय का एक नया स्रोत भी बनाएगा। प्रधान सचिव पर्यटन मुकेश कुमार मेश्राम ने इसे “भारत की सॉफ्ट पावर” करार दिया और कहा, “आज के बच्चे, जो कंक्रीट के जंगलों में पले-बढ़े हैं, गायों, कुओं और रंगोलियों से आकर्षित हैं। यह हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर है।”
Disclaimer: यह लेख हाल के समाचारों, ग्रामीण पर्यटन कॉन्क्लेव 2025 की रिपोर्ट्स और उत्तर प्रदेश सरकार की आधिकारिक घोषणाओं पर आधारित है। डेटा और जानकारी विश्वसनीय स्रोतों से ली गई है, लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे नवीनतम अपडेट के लिए आधिकारिक वेबसाइट्स और समाचार स्रोतों की जाँच करें।