**
“उत्तर प्रदेश सरकार ने रामायण सर्किट के तहत अयोध्या को पर्यटन हब बनाने के लिए करोड़ों रुपये आवंटित किए हैं। राम मंदिर के बाद पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, सर्किट के 15 स्थलों पर बुनियादी ढांचे का विकास तेजी से हो रहा है। यह योजना रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण को बढ़ावा देगी।” ****
अयोध्या में रामायण सर्किट: यूपी की नई पर्यटन रणनीति
उत्तर प्रदेश सरकार ने रामायण सर्किट को बढ़ावा देने के लिए अयोध्या में पर्यटन विकास को प्राथमिकता दी है। 2023-24 के पूरक बजट में, अयोध्या के लिए 100 करोड़ रुपये रामोत्सव जैसे आयोजनों और बुनियादी ढांचे के लिए आवंटित किए गए। इसके अलावा, इंटरनेशनल रामायण एंड वैदिक रिसर्च इंस्टीट्यूट के लिए 25 करोड़ रुपये और पुराने मंदिरों, मठों, और धार्मिक स्थलों के संरक्षण के लिए 10 करोड़ रुपये दिए गए।
रामायण सर्किट, जो स्वदेश दर्शन योजना का हिस्सा है, 15 स्थानों को जोड़ता है, जिनमें उत्तर प्रदेश के अयोध्या, नंदीग्राम, श्रृंगवेरपुर, और चित्रकूट शामिल हैं। ये स्थान भगवान राम के जीवन से जुड़े हैं, जैसे राम जन्मभूमि और भरतकुंड, जहां राम और भरत का मिलन हुआ था। 2024 में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद, अयोध्या में पर्यटकों की संख्या 110 मिलियन तक पहुंची, जो वाराणसी को पीछे छोड़ते हुए यूपी का टॉप पर्यटन स्थल बन गया।
सरकार ने सर्किट के तहत सड़क, रेल, और हवाई कनेक्टिविटी को बेहतर करने की योजना बनाई है। अयोध्या और नेपाल के जनकपुर के बीच डायरेक्ट बस सर्विस शुरू हो चुकी है, जो सीता की जन्मस्थली को जोड़ती है। इसके अलावा, रामायण सर्किट ट्रेन दिल्ली से प्रमुख स्थलों तक चलती है, जिससे तीर्थयात्रियों को सुविधा मिल रही है।
पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, रामायण सर्किट के तहत बिहार के सीतामढ़ी में पुनौरा धाम के लिए 143 करोड़ रुपये और अन्य स्थलों के लिए अतिरिक्त फंड स्वीकृत किए गए हैं। ये निवेश न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देंगे, बल्कि स्थानीय स्तर पर होटल, रेस्तरां, और परिवहन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी पैदा करेंगे।
अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर, हनुमान गढ़ी, और कनक भवन जैसे स्थल पहले से ही पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य सांस्कृतिक संरक्षण के साथ-साथ आधुनिक सुविधाएं जैसे स्वच्छ पेयजल, बेहतर आवास, और डिजिटल टूर गाइड प्रदान करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सर्किट भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूत करेगा।
हालांकि, चुनौतियां भी हैं। 2021 में, रामायण सर्किट नेशनल कमेटी के प्रमुख महेश शर्मा ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर परियोजना में देरी पर निराशा जताई थी। अब, 2025 तक अयोध्या सर्किट को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए भारत सरकार ने भारी निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
Disclaimer: यह लेख हाल के समाचारों, सरकारी घोषणाओं, और पर्यटन मंत्रालय की रिपोर्ट्स पर आधारित है। डेटा और तथ्य विश्वसनीय स्रोतों से लिए गए हैं, लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे नवीनतम अपडेट के लिए आधिकारिक वेबसाइट्स जैसे uptourism.gov.in और pib.gov.in की जांच करें।