“उत्तर प्रदेश में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान ने 2025 में नई रफ्तार पकड़ी है। नए जागरूकता अभियानों के जरिए 26 लाख से अधिक महिलाओं और बालिकाओं को जोड़ा गया। रैलियों, सोशल मीडिया और ग्रामीण स्तर पर अनोखे कार्यक्रमों से लिंग भेदभाव को खत्म करने की मुहिम तेज। यूपी सरकार का लक्ष्य: 2030 तक लिंगानुपात में 10% सुधार।”
यूपी में बेटी बचाओ अभियान: जागरूकता की नई पहल
उत्तर प्रदेश सरकार ने 2025 में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (BBBP) अभियान को नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाया है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में 23,184 गतिविधियों के माध्यम से 26.60 लाख महिलाओं और बालिकाओं को जागरूक किया गया। यह अभियान लिंग भेदभाव को खत्म करने और बालिकाओं की शिक्षा व सुरक्षा को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
प्रदेश में जागरूकता रैलियों, सोशल मीडिया कैंपेन और ग्रामीण स्तर पर अनोखे कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। उदाहरण के लिए, लखनऊ और वाराणसी जैसे शहरों में ‘बेटी जन्मोत्सव’ और ‘सेल्फी विद डॉटर’ जैसे कार्यक्रमों ने लोगों का ध्यान खींचा है। इन पहलों ने न केवल सामाजिक सोच को बदला, बल्कि लिंगानुपात (Sex Ratio at Birth) में भी सुधार दर्ज किया है। 2014-15 में 918 थी, जो 2023-24 में बढ़कर 930 हो गई।
यूपी सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष जोर दिया है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के सहयोग से 80,000 गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य और पोषण के बारे में जानकारी दी गई। इसके अलावा, अवैध गर्भपात पर रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं। हाल ही में, हिसार के एक अस्पताल का लाइसेंस रद्द किया गया, जो अवैध गर्भपात में लिप्त था।
सोशल मीडिया पर डिप्टी कमिश्नरों के हैंडल्स के जरिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। प्रत्येक जिले में सेक्स रेशियो की जानकारी देने वाले बैनर रैलियों में प्रदर्शित किए जा रहे हैं। ग्रामीण स्तर पर कुंआ पूजन और लोहड़ी जैसे परंपरागत उत्सवों को अब बेटियों के जन्म के उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है, जिससे सामाजिक स्वीकार्यता बढ़ी है।
यूपी सरकार ने सुकन्या समृद्धि योजना को भी बढ़ावा दिया है। 2025 तक उत्तर गुजरात क्षेत्र में 4,50,000 सुकन्या समृद्धि खाते खोले गए, जो बालिकाओं के भविष्य को सुरक्षित करने में मदद कर रहे हैं। इसके अलावा, स्कूलों में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें और इंसीनरेटर लगाए गए हैं, जिससे मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा मिला है।
हालांकि, चुनौतियां भी हैं। संसदीय समिति ने 2021 में बताया था कि BBBP योजना के तहत 78.91% फंड्स विज्ञापनों पर खर्च हुए, जबकि स्वास्थ्य और शिक्षा पर केवल 25% ही खर्च किए गए। यूपी सरकार ने इस आलोचना को ध्यान में रखते हुए 2025 में फंड उपयोग की रणनीति को और प्रभावी करने का वादा किया है।
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एक बयान में कहा, “बेटी बचाओ अभियान केवल एक योजना नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का आंदोलन है। हमारा लक्ष्य 2030 तक लिंगानुपात को 10% और बेहतर करना है।” इस दिशा में, सरकार ने जिला स्तर पर 640 लिंग-संवेदनशील जिलों में विशेष हस्तक्षेप की योजना बनाई है।
Disclaimer: यह लेख नवीनतम समाचार, सरकारी रिपोर्ट्स, और विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित है। डेटा और आंकड़े आधिकारिक वेबसाइट्स और हाल के X पोस्ट्स से लिए गए हैं। व्यक्तिगत सलाह के लिए संबंधित सरकारी विभागों से संपर्क करें।