“उत्तर प्रदेश सरकार ने स्थानीय कलाकारों और सांस्कृतिक उत्सवों के लिए 2025-26 में 5 लाख रुपये तक के अनुदान की घोषणा की है। यह योजना पारंपरिक कला, संगीत और नृत्य को बढ़ावा देगी। 500 से अधिक उत्सवों को फंडिंग मिलेगी, जिसमें स्थानीय और आदिवासी कलाकारों को प्राथमिकता दी जाएगी। आवेदन प्रक्रिया नवंबर 2025 से शुरू होगी।”
यूपी में सांस्कृतिक उत्सवों को नया जीवन: कलाकारों के लिए अनुदान
उत्तर प्रदेश सरकार ने 2025-26 के लिए सांस्कृतिक उत्सवों और स्थानीय कलाकारों को समर्थन देने के लिए एक महत्वाकांक्षी अनुदान योजना शुरू की है। इस योजना के तहत, पारंपरिक और समकालीन कला रूपों जैसे लोक नृत्य, संगीत, थिएटर, और दृश्य कला को बढ़ावा देने के लिए 5 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। संस्कृति विभाग के अनुसार, इस साल 500 से अधिक सांस्कृतिक उत्सवों को फंडिंग दी जाएगी, जिसमें कुम्भ मेला, होली उत्सव, और क्षेत्रीय लोक उत्सव जैसे रामलीला और नौटंकी शामिल हैं।
यह योजना विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के कलाकारों पर केंद्रित है। पिछले साल के आंकड़ों के अनुसार, यूपी में 300 से अधिक छोटे-बड़े सांस्कृतिक उत्सव आयोजित हुए, जिनमें 60% से अधिक में स्थानीय कलाकारों ने भाग लिया। इस बार, सरकार ने विशेष रूप से बुंदेलखंड, अवध, और पूर्वांचल जैसे क्षेत्रों में आयोजनों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है।
अनुदान के लिए पात्रता मानदंडों में शामिल है कि आवेदक उत्तर प्रदेश का निवासी हो, और उसका आयोजन सार्वजनिक स्थानों पर मुफ्त या न्यूनतम शुल्क (5 रुपये से कम) पर हो। गैर-लाभकारी संगठन, स्थानीय बैंड परिषद, और आदिवासी समुदाय इस योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, और नवंबर 2025 से culture.up.gov.in पर पोर्टल खुलेगा।
योजना के तहत, बड़े उत्सवों (2,000 से अधिक दर्शक) के लिए 5 लाख रुपये तक, मध्यम उत्सवों (500-2,000 दर्शक) के लिए 2 लाख रुपये, और छोटे उत्सवों (500 से कम दर्शक) के लिए 50,000 रुपये तक का अनुदान उपलब्ध है। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि फंड का उपयोग पारदर्शी हो, और इसके लिए प्रत्येक आयोजन के बाद विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
पिछले साल, लखनऊ के एक लोक उत्सव में 200 से अधिक स्थानीय कलाकारों ने भाग लिया, जिससे न केवल कला को बढ़ावा मिला बल्कि स्थानीय पर्यटन में भी 20% की वृद्धि हुई। इस तरह के आयोजनों से न केवल सांस्कृतिक विरासत संरक्षित होती है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना यूपी के सांस्कृतिक परिदृश्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाएगी।
Disclaimer: यह लेख उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग की आधिकारिक घोषणाओं, स्थानीय समाचार स्रोतों, और सांस्कृतिक संगठनों के इनपुट पर आधारित है। डेटा और तथ्य 2 सितंबर 2025 तक के उपलब्ध स्रोतों पर आधारित हैं।