“उत्तर प्रदेश डिजिटल क्रांति का नया केंद्र बन रहा है। योगी सरकार की डेटा सेंटर नीति से ₹30,000 करोड़ का निवेश और हजारों नौकरियाँ आईं। यूपीआई ट्रांजैक्शन में रिकॉर्ड वृद्धि और साइबर सुरक्षा पर जोर दे रहा है। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को नई दिशा दे रहा है।”
यूपी में डिजिटल बदलाव: डेटा सेंटर से यूपीआई तक का सफर
उत्तर प्रदेश, जो कभी खेती-बाड़ी और पारंपरिक उद्योगों के लिए जाना जाता था, अब डिजिटल क्रांति का गढ़ बन रहा है। योगी सरकार की डेटा सेंटर नीति 2021 ने इस बदलाव की नींव रखी। हाल के आँकड़ों के अनुसार, इस नीति ने ₹30,000 करोड़ से अधिक का निवेश आकर्षित किया, जिससे 10,000 से ज्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियाँ पैदा हुईं। गाजियाबाद में सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (CEL) के स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नए डेटा सेंटर का शिलान्यास किया, जो राज्य को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में अग्रणी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
इसके साथ ही, यूपीआई (UPI) ने उत्तर प्रदेश में डिजिटल भुगतान को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया। मई 2025 में यूपीआई के जरिए ₹25.14 लाख करोड़ के ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए, जो भारत के डिजिटल अर्थव्यवस्था की ताकत को दर्शाता है। यूपी के छोटे शहरों और गाँवों में भी डिजिटल भुगतान का चलन बढ़ा है। टियर-2 और टियर-3 शहरों से 45% स्टार्टअप्स का उदय इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण इलाके अब डिजिटल नवाचार का केंद्र बन रहे हैं।
साइबर सुरक्षा भी यूपी सरकार की प्राथमिकता में है। डीजीपी राजीव कृष्ण ने हाल ही में 21 आईपीएस अधिकारियों को साइबर क्राइम से निपटने की जिम्मेदारी सौंपी। इन अधिकारियों को एक महीने में साइबर सुरक्षा के लिए रोडमैप तैयार करना है, ताकि डिजिटल अपराधों पर लगाम लगाई जा सके। यह कदम डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ नागरिकों के डेटा की सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी डिजिटल पह部分
Disclaimer: यह लेख हाल के समाचारों, सरकारी नीतियों, और डिजिटल ट्रेंड्स पर आधारित वास्तविक डेटा और शिक्षित अनुमानों पर आधारित है। जानकारी विश्वसनीय स्रोतों जैसे न्यूज़ वेबसाइट्स और X पोस्ट्स से ली गई है। यह सलाहकारी नहीं है, बल्कि सूचनात्मक है।