“उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार ने 450+ चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना शुरू की है। 16 शहरों में 320 स्टेशन और चार प्रमुख एक्सप्रेसवे पर 26 स्टेशन बनेंगे। 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी और PPP मॉडल से निवेश को बढ़ावा मिलेगा, जिससे हरित परिवहन को गति मिलेगी।”
उत्तर प्रदेश में EV क्रांति: 450 से अधिक चार्जिंग स्टेशन का रोडमैप
उत्तर प्रदेश सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है, जिसके तहत राज्य में 450 से अधिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं। यह कदम पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
16 शहरों में 320 चार्जिंग स्टेशन: शहरी परिवहन निदेशालय ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत 16 प्रमुख शहरों में 320 पब्लिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना बनाई है। अयोध्या में सबसे अधिक 28 और लखनऊ में 27 स्टेशन बनाए जाएंगे। अन्य शहरों में कानपुर (26), प्रयागराज (25), मेरठ और अलीगढ़ (22-22), गोरखपुर और मथुरा (21-21), आगरा, फिरोजाबाद, वाराणसी, और झांसी (20-20), बरेली (16), मुरादाबाद (7), और सहारनपुर (5) शामिल हैं। प्रत्येक स्टेशन के लिए 180 वर्ग फुट जमीन नगर निगम उपलब्ध कराएंगे, और बिजली कनेक्शन में सहायता करेंगे।
एक्सप्रेसवे पर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: उत्तर प्रदेश के चार प्रमुख एक्सप्रेसवे—बुंदेलखंड, पूर्वांचल, आगरा-लखनऊ, और गोरखपुर लिंक—पर 26 चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। इनके लिए सरकार 2,000 वर्ग फुट जमीन 10 साल के लीज पर देगी। यूपीडा (Uttar Pradesh Expressways Industrial Development Authority) ने 11 कंपनियों, जैसे Reliance, Adani Total Energy, और Siemens, के साथ मिलकर इस परियोजना को गति दी है। स्टेशनों पर दोपहिया, तिपहिया, चारपहिया, और ई-बसों के लिए फास्ट और स्लो चार्जर उपलब्ध होंगे।
सब्सिडी और निवेश को बढ़ावा: उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है, जो EV चार्जिंग स्टेशनों के अपस्ट्रीम इंफ्रास्ट्रक्चर लागत पर 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी देगा। यह सब्सिडी भवन निर्माण, सिविल वर्क्स, चार्जर, और बैटरी उपकरणों पर लागू होगी। इन्वेस्ट यूपी को इस नीति के क्रियान्वयन के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है। इस कदम से निवेशकों को प्रोत्साहन मिलेगा और EV अपनाने की गति बढ़ेगी।
UPREV की भूमिका: यूपी रिन्यूएबल एंड ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (UPREV) को चार्जिंग स्टेशनों के विकास और रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई है। यह कंपनी नेशनल हाईवे, एक्सप्रेसवे, और ग्रामीण सड़कों पर चार्जिंग स्टेशनों का जाल बिछाएगी। UPREV के प्रबंध निदेशक अनुपम शुक्ला ने बताया कि कंपनी उपभोक्ताओं के लिए किफायती टैरिफ निर्धारित करेगी, जो औसत लागत से कम होगा।
EV की बढ़ती मांग: उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। 2024 में 1,55,889 EV पंजीकरण के साथ यूपी देश में सबसे अधिक EV उपयोग वाला राज्य बन गया है। प्रतिवर्ष 47% की वृद्धि की संभावना के साथ, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार जरूरी हो गया है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक पूरे परिवहन को इलेक्ट्रिक बनाने का है।
किफायती चार्जिंग दरें: उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों के लिए टैरिफ को औसत लागत से कम रखा है। प्रति किलोवाट-घंटा (kWh) 9.74 रुपये की दर से चार्जिंग सेवाएं उपलब्ध होंगी, जिससे EV मालिकों को आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
हरित परिवहन और रोजगार: योगी सरकार की इस पहल से न केवल पर्यावरण को लाभ होगा, बल्कि रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा। EV नीति 2022-27 के तहत 30,000 करोड़ रुपये के निवेश और 10 लाख रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य है।
Disclaimer: यह लेख हाल के समाचारों, सरकारी घोषणाओं, और विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित है। जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया गया है, लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि करें।