“उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की नई योजनाएं ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा दे रही हैं। 2025 में 15 लाख हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती से 25 लाख से अधिक किसानों को लाभ होगा। गौ-आधारित उर्वरकों, सब्सिडी और आधुनिक मंडियों के साथ किसानों की आय बढ़ेगी। विश्व बैंक समर्थित यूपी एग्रीस योजना से 10 लाख किसानों को सीधा फायदा मिलेगा।”
यूपी में जैविक खेती का नया दौर: किसानों के लिए सुनहरा अवसर
उत्तर प्रदेश सरकार ने 2025 में ऑर्गेनिक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की हैं, जो किसानों की आय को दोगुना करने की दिशा में बड़ा कदम हैं। परम्परागत कृषि विकास योजना के तहत, राज्य में 15 लाख हेक्टेयर भूमि पर ऑर्गेनिक और नेचुरल फार्मिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे 25 लाख से अधिक किसान लाभान्वित होंगे।
इसके तहत, गौ-आधारित प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए सभी 75 जिलों में पंचगव्य आधारित दवाइयां, गौ-पेंट और ऑर्गेनिक उर्वरक इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। प्रत्येक जिले में एक आत्मनिर्भर गौशाला होगी, जो पर्यावरण के अनुकूल खेती को बढ़ावा देगी और मिट्टी की उर्वरता में सुधार करेगी। पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि गाय के गोबर और मूत्र से बने वर्मीकम्पोस्ट को किसानों को बेचा जाएगा, जिससे उनकी लागत कम होगी और आय बढ़ेगी।
विश्व बैंक के सहयोग से शुरू हुई यूपी एग्रीस परियोजना भी किसानों के लिए गेम-चेंजर साबित हो रही है। इस 4,000 करोड़ रुपये की परियोजना का पहला चरण पूर्वी उत्तर प्रदेश के 21 और बुंदेलखंड के 7 जिलों में लागू हो रहा है। इससे 10 लाख किसानों को सीधा लाभ मिलेगा, जिनमें 30% महिलाएं शामिल हैं। परियोजना के तहत मिर्च, मूंगफली और मटर जैसे फसलों के लिए क्लस्टर बनाए जा रहे हैं, और 500 किसानों को आधुनिक तकनीकों की ट्रेनिंग के लिए विदेश भेजा जाएगा।
इसके अलावा, योगी सरकार ने 16 जिलों में अत्याधुनिक जैविक मंडियों की स्थापना की योजना बनाई है। ये मंडियां ई-मार्केटिंग से जुड़ी होंगी, जिससे जैविक उत्पादों का निर्यात बढ़ेगा और किसानों को स्थानीय स्तर पर बेहतर बाजार मिलेगा। पहले चरण में इन मंडियों के लिए 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। गंगा बेसिन में नमामि गंगे योजना के तहत जैविक खेती समूह बनाए गए हैं, जो मक्का, धान, गन्ना, और सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं।
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन भी पूरे प्रदेश में विस्तारित हो रहा है। हर ग्राम पंचायत में 50 हेक्टेयर के क्लस्टर बनाए जा रहे हैं, जिसमें कम से कम 125 किसानों को शामिल किया जाएगा। पहले साल प्रत्येक क्लस्टर को 7.16 लाख रुपये और दूसरे साल 6.83 लाख रुपये का अनुदान मिलेगा। साथ ही, किसानों को FPO (Farmers Producer Organizations) से जोड़ा जा रहा है, ताकि उन्हें आधुनिक मशीनरी, वेयरहाउस और मार्केटिंग सुविधाएं मिल सकें।
हालांकि, कुछ चुनौतियां भी हैं। किसान मेवालाल जैसे कई किसानों का कहना है कि ऑर्गेनिक खेती पर विशेष बजट होने के बावजूद, जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्यान्वयन की कमी है। उनकी मांग है कि सरकार कृषि बजट बढ़ाए और मनरेगा मजदूरों को खेती से जोड़े। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑर्गेनिक खेती की लागत शुरू में अधिक हो सकती है, लेकिन लंबे समय में यह मिट्टी की उर्वरता और किसानों की आय दोनों को बढ़ाएगी।
यूपी सरकार ने नदियों के किनारे 5 किमी के दायरे में प्राकृतिक खेती को प्राथमिकता दी है। गाजियाबाद में नेशनल सेंटर फॉर ऑर्गेनिक फॉर्मिंग (NCOF) जैसी सुविधाएं इस दिशा में सहायक हैं। साथ ही, लखनऊ, मेरठ और वाराणसी में जैविक उत्पादों के परीक्षण के लिए प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में जैविक खेती का रकबा 1,01,459 हेक्टेयर से बढ़ाकर 3,00,000 हेक्टेयर करना है।
Disclaimer: यह लेख हाल के समाचारों, सरकारी योजनाओं और विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित है। डेटा और तथ्य ABP Live, Jagran, Live Hindustan, और Kisatak जैसे स्रोतों से लिए गए हैं। ऑर्गेनिक खेती से संबंधित योजनाओं का लाभ उठाने के लिए किसानों को आधिकारिक वेबसाइट्स जैसे agriculture.up.gov.in पर संपर्क करना चाहिए।