“उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के लिए नई ऋण योजना शुरू की है, जिसके तहत महिलाओं को ₹5 लाख तक का ऋण मिलेगा। यह योजना ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, छोटे व्यवसाय शुरू करने और आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करने पर केंद्रित है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, 5 लाख नए SHGs बनाए जाएंगे।”
यूपी में महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूह ऋण: नया कदम
उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के लिए एक नई ऋण योजना शुरू की है। हाल ही में बस्ती जिले में आयोजित एक कार्यक्रम में, अधिकारियों ने घोषणा की कि SHGs को ₹5 लाख तक का ऋण प्रदान किया जाएगा, साथ ही प्रशिक्षण और मार्केटिंग सहायता भी दी जाएगी। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को छोटे व्यवसाय, जैसे कि हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, और कृषि से संबंधित गतिविधियों में सक्षम बनाना है।
2022 में, उत्तर प्रदेश में पहले से ही 5 लाख नए SHGs बनाने की योजना की घोषणा की गई थी, जिसमें प्रत्येक समूह से जुड़ी महिलाओं को ₹1 लाख तक का क्रेडिट कार्ड प्रदान करने का लक्ष्य था। अब, 2025 में, सरकार ने इस योजना को और विस्तार देते हुए ऋण की सीमा बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी है। यह कदम Deendayal Antyodaya Yojana – National Rural Livelihoods Mission (DAY-NRLM) के तहत लागू किया जा रहा है, जिसके तहत देशभर में SHGs को ₹11 लाख करोड़ से अधिक के ऋण वितरित किए गए हैं।
यूपी के ग्रामीण क्षेत्रों में SHGs ने महिलाओं के लिए आर्थिक अवसरों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उदाहरण के लिए, बस्ती जिले में SHGs की महिलाओं ने स्थानीय उत्पादों जैसे अचार, पापड़, और हस्तनिर्मित वस्तुओं के व्यवसाय को बढ़ावा दिया है। सरकार की नई योजना के तहत, इन समूहों को बैंकों के साथ जोड़ा जाएगा ताकि कम ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध हो सके। इसके अलावा, SHGs के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने, सामान्य लेखा-जोखा, और मार्केटिंग की तकनीकों पर ध्यान दिया जाएगा।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में SHGs की बैंक ऋण चुकौती दर 96% से अधिक है, जो उनकी विश्वसनीयता और अनुशासन को दर्शाता है। उत्तर प्रदेश में यह दर और भी प्रभावशाली रही है, जहां SHGs ने 99% ऋण चुकौती का रिकॉर्ड बनाया है। इस सफलता को देखते हुए, सरकार ने SHGs को collateral-free loans की सीमा को ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख कर दिया है, जो 7 करोड़ परिवारों को लाभ पहुंचाएगा।
यूपी में SHGs की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार ने स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नए समूहों का गठन करें। बस्ती, लखनऊ, और वाराणसी जैसे जिलों में पहले से ही SHGs सक्रिय हैं, और अब अन्य जिलों में भी इस मॉडल को लागू किया जा रहा है। योजना के तहत, महिलाओं को न केवल वित्तीय सहायता मिलेगी, बल्कि उनके उत्पादों के लिए ऑनलाइन मार्केटप्लेस जैसे Deoghar Mart की तर्ज पर स्थानीय बाजार भी विकसित किए जाएंगे।
यह योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने और उनकी आय को ₹1 लाख तक बढ़ाने के लक्ष्य के साथ लागू की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी, बल्कि सामाजिक समानता और लैंगिक सशक्तिकरण को भी मजबूत करेगी। हालांकि, कुछ चुनौतियां जैसे बैंकों तक पहुंच और जागरूकता की कमी अभी भी बनी हुई हैं, जिन्हें सरकार प्रशिक्षण और जागरूकता अभियानों के माध्यम से हल करने की योजना बना रही है।
Disclaimer: यह लेख हाल के समाचारों, सोशल मीडिया पोस्ट, और विश्वसनीय वेब स्रोतों पर आधारित है। डेटा और तथ्य प्रामाणिक स्रोतों से लिए गए हैं, लेकिन स्थानीय नीतियों और योजनाओं में बदलाव हो सकता है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे नवीनतम जानकारी के लिए संबंधित सरकारी विभागों से संपर्क करें।