उत्तर प्रदेश में PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जहां 1.31 लाख घरों में सोलर रूफटॉप लगाए गए। लखनऊ 11,435 इंस्टॉलेशन के साथ अव्वल है। योजना से बिजली बिल में कमी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है। योगी सरकार के लक्ष्य और सब्सिडी की जानकारी के साथ जानें कैसे यूपी सौर क्रांति में अग्रणी बन रहा है।
उत्तर प्रदेश में सौर क्रांति: PM सूर्य घर योजना की अभूतपूर्व सफलता
उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा ने नया इतिहास रच दिया है। PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत, 31 मई 2025 तक प्रदेश में 1.31 लाख घरों की छतों पर सोलर रूफटॉप पैनल स्थापित किए जा चुके हैं। लखनऊ इस दौड़ में सबसे आगे है, जहां 11,435 घरों में सोलर पैनल लगाए गए हैं, जो पूरे प्रदेश में सर्वाधिक है। वाराणसी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र, 4,088 इंस्टॉलेशन के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि कानपुर (1,909), आगरा (1,364) और प्रयागराज (1,349) भी पीछे नहीं हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस योजना को गति देने के लिए प्रत्येक जिले को अलग-अलग लक्ष्य दिए हैं। उत्तर प्रदेश का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में 25 लाख घरों में सोलर पैनल स्थापित करना है, जो केंद्र सरकार के 1 करोड़ घरों के राष्ट्रीय लक्ष्य का 25% है। योगी सरकार की सक्रिय मॉनिटरिंग और जागरूकता अभियानों ने इस योजना को जन-जन तक पहुंचाया है।
सब्सिडी और आर्थिक लाभ
PM सूर्य घर योजना के तहत सरकार सोलर पैनल इंस्टॉलेशन पर आकर्षक सब्सिडी दे रही है। 1 किलोवाट सिस्टम पर 45,000 रुपये, 2 किलोवाट पर 90,000 रुपये और 3 किलोवाट पर 1,08,000 रुपये की सब्सिडी उपलब्ध है। उदाहरण के लिए, 2 किलोवाट का सोलर पैनल लगाने में कुल 1.2 लाख रुपये का खर्च आता है, जिसमें से 90,000 रुपये की सब्सिडी मिलने पर उपभोक्ता को केवल 30,000 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यह सिस्टम प्रतिदिन 8-10 यूनिट बिजली पैदा करता है, जिससे उपभोक्ता न केवल 300 यूनिट मुफ्त बिजली पाते हैं, बल्कि अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेचकर आय भी कमा सकते हैं।
लखनऊ के रवि प्रताप सिंह, जो 2016 से सोलर बिजनेस में हैं, बताते हैं कि 2024 में योजना के प्रचार-प्रसार के बाद डिमांड में जबरदस्त उछाल आया। उनकी कंपनी अब प्रतिदिन औसतन 25 सोलर प्लांट इंस्टॉल कर रही है। बिजनौर में 26,000 से अधिक उपभोक्ताओं ने योजना के लिए आवेदन किया, और 400 से ज्यादा घरों में पैनल लग चुके हैं।
पर्यावरण और रोजगार पर प्रभाव
यह योजना केवल बिजली बिल कम करने तक सीमित नहीं है। 2.5 गीगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता के साथ, योजना ने प्रति वर्ष 1.8 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाई है। यह भारत के 2030 तक 50% ऊर्जा जरूरतों को नवीकरणीय स्रोतों से पूरा करने के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके अलावा, सोलर पैनल निर्माण, इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस में तकनीकी रूप से कुशल युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।
चुनौतियां और समाधान
हालांकि, उत्तर प्रदेश में योजना की प्रगति कुछ जिलों में धीमी रही है। संसदीय समिति ने हाल ही में चिंता जताई कि यूपी और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों की हिस्सेदारी केवल 8% और 3% है। इसका प्रमुख कारण जनता में जागरूकता की कमी और कुछ राज्यों में मुफ्त बिजली की अन्य योजनाओं का प्रभाव है, जिससे लोग सोलर पैनल लगाने में रुचि कम दिखा रहे हैं। सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए पंचायतों और शहरी निकायों को जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, सब्सिडी को 7 दिनों के भीतर खाते में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को तेज किया गया है।
यूपी का सौर भविष्य
उत्तर प्रदेश सरकार अयोध्या को सोलर सिटी के रूप में विकसित करने पर भी काम कर रही है। यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगा, बल्कि यूपी को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रणी बनाएगा। योजना के तहत अब तक 47.3 लाख आवेदनों के साथ 4,770 करोड़ रुपये की सब्सिडी वितरित की जा चुकी है। 2027 तक 25 लाख घरों का लक्ष्य पूरा करने के लिए योगी सरकार ने वेंडर्स की संख्या बढ़ाने और प्रशिक्षण पर जोर देने का निर्देश दिया है।
Disclaimer: यह लेख PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से संबंधित नवीनतम समाचार और डेटा पर आधारित है। जानकारी सरकारी पोर्टल, न्यूज वेबसाइट्स और X पर उपलब्ध पोस्ट्स से ली गई है। सब्सिडी और इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया के लिए आधिकारिक वेबसाइट pmsuryaghar.gov.in पर जाएं।