“यूपी में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए नए वाइल्डलाइफ सर्किट लॉन्च किए गए हैं। दुधवा, पिलिभीत, और रानीपुर जैसे क्षेत्रों में जंगल सफारी, स्थानीय संस्कृति, और जैव-विविधता संरक्षण पर जोर दिया जा रहा है। यह पहल रोजगार, संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देगी, जिससे यूपी 2025 में इको-टूरिज्म का हब बन सकता है।”
यूपी में इको-टूरिज्म का नया अध्याय
उत्तर प्रदेश सरकार ने इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए नौ नए वाइल्डलाइफ सर्किट शुरू किए हैं, जो 2025 में पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनने की तैयारी में हैं। इन सर्किट्स में बундेलखंड, विंध्य वन, गंगा बेसिन, ब्रज भूमि, और तेराई टाइगर सर्किट शामिल हैं, जो दुधवा नेशनल पार्क, पिलिभीत टाइगर रिजर्व, और रानीपुर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी जैसे क्षेत्रों को जोड़ते हैं। इन सर्किट्स का उद्देश्य जैव-विविधता संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ पहुंचाना है।
पिलिभीत टाइगर रिजर्व और दुधवा नेशनल पार्क में जंगल सफारी की शुरुआत हो चुकी है, जहां पर्यटक बाघ, गैंडा, और दुर्लभ पक्षियों को देख सकते हैं। चूंका बीच से दुधवा तक का नया सर्किट पर्यटकों को स्थानीय थारू जनजाति की संस्कृति और हस्तशिल्प से भी रूबरू कराता है। 2024-25 के पर्यटन सीजन में, नवंबर 2024 से जून 2025 तक, इन क्षेत्रों में 30% अधिक पर्यटकों की उम्मीद है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा।
रानीपुर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी, जो मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व के पास स्थित है, पहली बार पर्यटकों के लिए खोला गया है। यह सैंक्चुरी 230 वर्ग किमी में फैली है और बाघों की आवाजाही के लिए एक महत्वपूर्ण कॉरिडोर के रूप में काम करती है। यहां स्थानीय गाइड्स को प्रशिक्षित किया जा रहा है, और थारू महिलाओं द्वारा बनाए गए जूट बैग्स, टोकरियां, और अगरबत्ती जैसे उत्पाद पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं।
यूपी इको-टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 2023 में स्थापित किया गया था, बफर जोन में इको-फ्रेंडली इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रहा है। इसमें जंगल कैंपिंग, साइकिलिंग, और रिवर क्रूज जैसी गतिविधियां शामिल हैं। बोर्ड ने स्थानीय लोगों के लिए 5,000 से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें 60% पद महिलाओं और आदिवासी समुदायों के लिए आरक्षित हैं।
2024 में, भारत का इको-टूरिज्म मार्केट 14 बिलियन USD तक पहुंचा, और यूपी इसमें महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2030 तक यह मार्केट 26.8 बिलियन USD तक पहुंच सकता है, जिसमें यूपी के सर्किट्स की भूमिका अहम होगी। सरकार की ‘देखो अपना देश’ पहल और सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के तहत, इन सर्किट्स में पर्यटकों की संख्या को नियंत्रित किया जा रहा है ताकि पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान न पहुंचे।
हालांकि, चुनौतियां भी हैं। शहरीकरण और बुनियादी ढांचे की कमी कुछ क्षेत्रों में बाधा बन रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इको-फ्रेंडली होमस्टे और कचरा प्रबंधन पर अधिक निवेश की जरूरत है। इसके बावजूद, यूपी का यह प्रयास न केवल पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने और जैव-विविधता संरक्षण में भी योगदान दे रहा है।
Disclaimer: यह लेख हाल के समाचारों, यूपी इको-टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड की रिपोर्ट्स, और विशेषज्ञों के विश्लेषण पर आधारित है। डेटा और तथ्य विश्वसनीय स्रोतों से लिए गए हैं, लेकिन क्षेत्रीय नीतियों में बदलाव के कारण जानकारी में अपडेट हो सकते हैं।